हमारा इतिहास

श्री गंगा सभा (रजि.), हरिद्वार

श्री गंगा सभा (रजि.) हरिद्वार की स्थापना भारत रत्न पंडित मदन मोहन मालवीय ने सन् 1916 में की थी।

सन् 1914 में तत्कालीन अंग्रेजी सरकार के नहर विभाग ने गंगा जी की प्राकृतिक एवं अविच्छिन्न धारा को बाँध द्वारा अवरुद्ध करके उसे कृत्रिम एवं नियन्त्रित धारा के रूप में हरकी पौड़ी में प्रवाहित करने की कलुषित योजना बनाई थी। इस योजना का ज्ञान होते ही स्थानीय तीर्थ- पुरोहित समाज एवं श्री महन्तों में असन्तोष उत्पन्न हो गया और शीघ्र ही यह असन्तोष एक तीव्र रोष में बदल गया। सौभाग्य से इस रोष को ब्राह्मण गौरव भारतरत्न महामना पं. मदन मोहन मालवीय जी का आशीर्वाद प्राप्त हो गया, उन्होंने तीर्थ- पुरोहित समाज तथा श्रीमहन्तों का नेतृत्व किया तथा एक जन- आन्दोलन को जन्म दिया।

अन्ततः अंग्रेजी सरकार के शासक गवर्नर महोदय को इस आन्दोलन के सम्मुख घुटने टेकने के लिए विवश होना पड़ा और गंगा जी की प्राकृतिक एवं अविच्छिन्न धारा पर बाँध लगाने की उक्त कलुषित योजना को रद्द करना पड़ा। गवर्नर महोदय ने स्पष्ट शब्दों में आश्वासन दिया कि धारा नं. 1 जिसके द्वारा ब्रह्मकुण्ड हरकी पौड़ी में जल पहुँचता है, उसे अवरुद्ध नहि किया जायेगा तथा निकटस्थ घाटों पर निर्बाध प्रवाहित होने दिया जायेगा। हिन्दू समाज की सहमति के बिना इस सम्बन्ध में कोई भी निर्णय न लिया जायेगा। निश्चय ही यह धर्म की अविस्मरणीय विजय थी।

परन्तु शीघ्र ही गवर्नर महोदय द्वारा दिये गये आश्वासन की नहर विभाग द्वारा अवहेलना आरम्भ हो गयी। नहर विभाग ने प्राकृतिक धारा नं. 1 पर एक बाँध बनवाना चाहा, जिसके निर्माण से गंगा जी की प्राकृतिक धारा की अविच्छिन्नता समाप्त होनी प्रायः निश्चित हो गई। अतः आन्दोलन ने पुनः जोर पकडा और भारत रत्न पंडित मदन मोहन मालवीय जी ने पुनः इस आन्दोलन का नेतृत्व किया देशभर में नहर विभाग के इस निर्णय के विरुद्ध सभाऐं आयोजित करके विरोध प्रदर्शित किया गया। इस आन्दोलन ने दो वर्ष के अन्दर विराट् रूप धरण कर लिया। परिणामस्वरूप तत्कालीन गवर्नर सर जेम्स मेस्टन का सिंहासन डोल उठा और विवश हो उन्हें इस आन्दोलन की तुष्टि का समाधान खोजने हेतु गम्भीर विचार करने के लिए एक विशाल सम्मेलन आयोजित करना पड़ा।

यह सम्मेलन 18- 19 दिसम्बर सन् 1916 को हरिद्वार में सम्पन्न हुआ जिसमें ग्वालियर, जयपुर, बीकानेर, पटियाला, अलवर, बनारस, कासिम बाजार आदि के राजा- महाराजा तथा अनेक विश्वविख्यात हिन्दू नेता सम्मिलित हुए। मालवीय जी ने इस आन्दोलन में भारतीय जनमानस का प्रतिनिध्त्विकिया तथा सरकार के निर्णय का जोरदार विरोध किया। दो दिन तक विस्तृत वाद- विवाद हुआ और अन्त में भारत रत्न पं. महामना मालवीय जी के अथक प्रयास से अंग्रेजी सरकार को जन आन्दोलन की भावना के समक्ष समर्पण करना पड़ा। फलस्वरूप सरकार को हिन्दू जनता से स्थाई एवं लिखित समझौता करना पड़ा जिसमें यह स्पष्ट उल्लेख किया गया कि हरकी पौड़ी से एक मील नीचे तक कोई बाँध नहीं बनाया जायेगा तथा गंगा जी की धारा को अविच्छिन्न बनाये रखने एवं तीर्थ की मर्यादा को अक्षुण्ण बनाये रखने के लिए सरकार द्वारा अनेक स्पष्ट आश्वासनों का इस समझौते में समावेश किया गया।

उक्त समझौते को दोनों पक्षों ने सर्व सम्मति से स्वीकार किया जिसके कारण जन- आन्दोलन की उग्रता पर्याप्त रूप से शान्त हो गई, परन्तु हिन्दू नेताओं के मस्तिष्क में यह आशंका शेष रह गयी कि इस समझौते की भविष्य में पुनः अवहेलना न हो जाये अथवा तीर्थ की पवित्राता एवं मर्यादा भंग न हो सके। अतः एक ऐसी संस्था की आवश्यकता अनुभव हुई जो हिन्दू जनता का स्थाई प्रतिनिध्त्वि कर सके तथा तीर्थ की मर्यादा एवं सुव्यवस्था को संतोषजनक रूप से बनाये रखने का महान उत्तरदायित्व वहन कर सके। इस पवित्रा भावना से प्रेरित होकर महामना मालवीय जी ने हरिद्वार के स्थानीय तीर्थ पुरोहित समाज और श्रीमहन्तों के सहयोग से सन् 1916 में श्री गंगा सभा (रजि.) हरिद्वार की स्थापना की।

सामाजिक सेवाएं

श्री गंगा आरती

हर की पौड़ी पर विश्व विख्यात गंगा आरती का आयोजन पंडित मदन मोहन मालवीय द्वारा 1916 में शुरू किया गया था और तभी से श्री गंगा सभा देशकाल के अनुरूप माँ गंगा की भव्य आरती का आयोजन प्रतिदिन दो बार, प्रातःकालीन मंगला आरती सूर्योदय के समय और सांध्यकालीन शृंगार आरती सूर्यास्त के समय पर करती आ रही है | प्रतिदिन सहस्त्रों भावुक भक्त माँ गंगा की अर्चना करने के लिए गंगा घाट के दोनों किनारों पर इकट्ठा होते हैं | श्री गंगा सभा इस अलौकिक आनन्द का लाभ उठाने के लिए आप सबको आमन्त्रित करती है।

मेला एवम पर्व प्रबंधन

श्री गंगा सभा सूचना एवं प्रसारण केंद्र अपने सैकड़ों स्वयंसेवियों के साथ मिलकर हर वर्ष सभी बड़े पर्व एवं त्योहारों पर तीर्थयात्रियों की भीड़ का संचालन करता है। हर वर्ष हमारा खोया पाया विभाग सैकड़ों बिछड़े हुए लोगों को उनके अपनों से मिलवाता है ओर जीन लोगों का कीमती सामान आरती, त्योहारों एवं मेलों के दौरान खो जाता है उन्हें उनका कीमती सामान खोजने मैं सहायता प्रदान करता है।

घाटों की सफाई एवं व्यवस्था

विश्वविख्यात तीर्थ हरिद्वार में ब्रह्मकुण्ड हर की पौड़ी, कुशावर्त एवं कनखल आदि प्रमुख तीर्थस्थलो की पवित्रता, स्व्च्ता एवं व्यवस्था का दायित्वा यहा की एक्मात्र प्रबन्धाकारिणी संस्था श्री गंगा सभा (रजि.) के ऊपर हैं। स्वयंसेवकों का एक समर्पित समूह हर समय हर-की-पौड़ी के आसपास सफाई बनाए रखने के लिए कार्यरत रहता है | श्री गंगा सभा का गंगा सेवक दल गंगा सफाई अभियान को बढ़ावा देने के लिए जन जागरूकता अभियान का संचालन समय समय पर करता रहता है |

धर्मार्थ नि:शुल्क चिकित्सा केंद्र

श्री गंगा सभा के द्वारा नि:शुल्क स्वास्थ्य सेवांए और चिकित्सा सुविधाएं प्रदान की जाती हैं | हमारे धर्मार्थ औषधालय हर-की-पौड़ी, ज्वालापुर और कनखल में जरूरतमंद लोगों को नि:शुल्क दवाएं प्रदान करते है। आपातकालीन चिकित्सा की स्थिति में श्री गंगा सभा द्वारा संचालित नि: शुल्क एम्बुलेंस सेवा किसी के भी द्वारा उपयोग किया जा सकता है, कई चिकित्सा और योग स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन श्री गंगा सभा द्वारा जनमानस की जागरूकता के लिए किया जाता हैं।

प्रबंधन

कृष्ण कुमार शर्मा
कृष्ण कुमार शर्मा
सभापति
प्रदीप झा
प्रदीप झा
अध्यक्ष
तन्मय वशिष्ठ
तन्मय वशिष्ठ
महामंत्री

श्री गंगा सभा की उपलब्धियां एवं कार्य विवरण

श्री गंगा सभा पंचांग (2018-2019)

श्री गंगाजी की महिमा - हरकि पौड़ी ब्रह्मकुंड पर मा गंगा की पवित्र महिमा

समाचार

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